मेरे जीवन के उपवन में
तू इस उपवन की तितली
फूलों का तुम रंग चुराती
भवरों को तुम रास न आती
मेरे जीवन के उपवन में
तू इस उपवन की तितली
उमड़-घुमड़ बलखा कर चलती
जैसे बादल बन कर कहीं बरसती
मेरे सावन की उम्मीद हो तुम
मेरे मौसम की गीत हो तुम
मेरी तन्हाई की मित हो तुम
मेरे जीवन के उपवन में
तू इस उपवन की तितली
कल्पना की सागर हो तुम
मेरी धरती की संबल हो तुम
शक्ति की परिभाषा हो तुम
हमारी उत्तम आशा हो तुम
तू शीतल काया वाली
विनम्रता,सरलता ,सरसता तेरी
हर मन को भाति हो तुम
कभी छन-छन तो कभी खन-खन
बहती झरनों की कल-कल हो तुम
कोयल की कोकिल हो तुम
सघन अरण्य की मृगनैनी हो तुम
मेरे जीवन की झंकार हो तुम
जैसे गांडीव की टंकार हो तुम
मेरे जीवन के उपवन में
तू इस उपवन की तितली ..!!

Hindi itni shudh,
ReplyDeleteLavz itne pyaare.
Aapki kavita ne,
Dil jeetli humaare!
Iss kavita ki aavaaz
Goonjti hai unn galiyon mein,
Jin galiyon mein
Khushiyon ki Ganga behti hain
Unn ansuni galiyon mein
Iss ansuni aavaaz se
Logon ke mann machal jaate hon
Aisi kavita hai yeah
Mere priya mitra ki
Ekk Ansuni Aavaaz.....
:D :D
Abhishek....Blogging prarambh karne ke iss shubh avsar par main tumhe dil se hardik badhaaiyaan deti hoon! ;-D Loved your poem so much that I wrote this poem for you spontaneously!!!! KEEP IT UP!!! Looking fwd to read more!! :))